आज मैंने मनोज बाजपेई का बहुत ही सुंदर ब्लॉग पढ़ा और मुझे अत्यधिक सांत्वना मिली की भारत में अभी हिन्दी जिंदा है, और यदि मनोज जी जैसे जागरूक और बुद्धिमान हिन्दी अभिनेता अभी भी बॉलीवुड में हैं तो शायद हमारा भविष्य इतना अन्धकारमय नहीं जितनी मुझे चिंता थी। मेरी इच्छा है कि मेरा यह ब्लॉग मनोज जी तक पहुंचे और वो जान सकें कि उनके काम और कला के प्रशंसक भारत से दूर भी मोजूद हैं और यदि वे कभी भी Detroit आयें तो हमारे गरीबखाने में उनका हार्दिक स्वागत है। हिन्दी फिल्मों कि अधिकतर अभिनेता व अभिनेत्रियाँ अकल से पैदल और कपडों की कमी से ग्रस्त लगते हैं। कभी कभी तो ऐसा लगता है की उन सबको शायद भारतीय होने से इंकार है और उन का बस चले तो सारे के सारे हॉलीवुड में स्थानांतरित हो जायें ----चाहे हॉलीवुड में उन के जैसे बेवकूफ नकलचियों को कोई ज़रा भी समय न दे।हिन्दी फिल्मों के महूरत "इंगरेजी" में होते हैं सब कुछ इंग्लिश में ही लिखा होता है व फिल्मों के पोस्टर केवल इंग्लिश में लिखे जाते हैं। देख कर हँसी भी आती है पर रोना ज़्यादा ......क्या हमारी अपनी मातृभाषा इतनी गयी गुजरी है की हम हिन्दी के शब्द सिर्फ़ इंग्लिश में ही लिख सकते हैं???? हमारी भाषा जो कि दुनिया की सारी भाषाओँ की जननी है अब अपने अस्तित्व से वंचित हो गयी है हमारे गुलामी से भरे व्यतीत के कारण हमारा भविष्य अपनी भाषा , सभ्यता और संस्कृति को छोड़ता जा रहा है। आप लोग इस विषय में अपने विचार प्रस्तुत करें कि हिन्दी का भविष्य कैसे सुधार जा सकता है। सब लोगों को इस नव वर्ष की शुभ कामनाएं नया साल आप सब के लिए सुख समृद्धि एवं शांतिवर्धक हो। नमस्कार!!

हिंदी ब्लॉग की दुनिया में स्वागत है. आपके विचारों से सहमत. इसी तरह लिखते रहिये - हम पढ़ते रहेंगे. बधाई एवं शुभकामनाएँ.
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंसुन्दर , पढ़कर अच्छा लगा, मनोज जी के ब्लॉग का लिंक भी देती तो सब लेख को पढ़ सकते
जवाब देंहटाएं---मेरे पृष्ठ
गुलाबी कोंपलें | चाँद, बादल
और शाम | तकनीक दृष्टा/Tech Prevue | आनंद बक्षी | तख़लीक़-ए-नज़र
अरे भाई...........भारत में अभी हिन्दी ही नहीं............दुर्भाग्य वश हिंदू भी जिन्दे हैं.........बेशक अपने अतीत मात्र को ढोते.......लेकिन अतीत से कोई सबक ना लेते...रही हिन्दी की बात.........तो हिन्दी हम जैसे जज्बातियों की तो माँ है.....और उसे हम कितना प्यार करते हैं.....सच कहें तो मैं बता भी नहीं सकता....मेरे दिल की इक-इक साँस में....मेरी पेशियों के इक-इक बूँद खून में.........मेरे जिस्म के पोर-पोर में........हिन्दी और उसकी संगिनी के रूप में उर्दू ऐसी बावस्ता है कि मैं हर वक्त इनके प्यार से लबरेज़ हूँ.........और इनका तहे-दिल धन्यवाद देता हूँ..........कि ये ना होती तो मेरा क्या होता.........!! ..........कि ये ना होती तो मेरा क्या होता.........!!..............मैंने तो सबसे प्यार ही हिन्दी की वजह से ही पाया है..........और हिन्दी के सिवा मेरी जीभ से कुछ निकलता ही नहीं..........इस हिन्दुस्तान में जब तक मैं और मेरे जैसे लोग हैं............हिन्दी और उर्दू दोनों का ही कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता............सच.........सच्ची-मुच्ची........!!
जवाब देंहटाएंअल्का जी आप उन कम होती हुए महिलाओं मैं से एक हैं जो अपनी भाषा के प्रति इतना लगाव दिखाती हैं वरना आज कल की कन्यांए अंग्रेजी भाषा के प्रति ऐसा अगाध प्रेम दर्शाती हैं जिसकी कोई सीमा नहीं हैं
जवाब देंहटाएंऔर जहाँ तक बॉलीवुड का सवाल है वे तो वो तुछ लोग हैं जो खाते तो हिन्दी का हैं लेकिन बात इंग्लिश मैं करतें चाहे इंग्लिश मैं हाथ क्यूँ न तंग हो |
इसी लिए आप मेरे लिए पूजनीय हैं अनुसरणीय हैं
मेरे ब्लॉग का नाम amitraghat.blogspot.com है कृपया घूमते घामते एक दृष्टी मेरे ब्लॉग पर भी घूमा लीजिये |
pranav saxena "amitraghat
अलकाजी आपका स्वागत है चिठ्ठेजगत के हिन्दि वर्जन मे। आपने मनोज वाजपेयीजी का हिन्दी ब्लोग से प्रभावित हुई है,पढकर अच्छा लगा। पर ईससे भी बढिया कि आपने हिन्दि मे ब्लोग बनाया और लिखा। मेरी ओर से आपको हार्दिक मगल भावनाए प्रेषित करता हु स्वीकार करे।
जवाब देंहटाएंकभी समय मिले तो हमारे ब्लोग का भी अवलोकना जरुर करे। पसन्द आये तो ब्लॉग का अनुसरण करें ।
आप लिखते रहे व हिन्दि को बढवा देने के लिये रोज दस ब्लोगो पर कमेन्ट दे।
बिल्कुल ठीक कहा है आपने; हिन्दी के विकास के लिए हम सभी को कार्य करना होगा।
जवाब देंहटाएंवाहवा अलका जी आपका हिन्दी प्रेम प्रणम्य है... आपको बधाई..
जवाब देंहटाएंश्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!!
जवाब देंहटाएं----
INDIAN DEITIES
aap u. k. me rahkar bhi hindi ki baat kar rahi hain.kintu bharat me kon bada angrej isi ki ladai chalti rahti hai.
जवाब देंहटाएंlhikhti rahiye.